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23 वर्षों से पक्की सड़क का इंतजार, जर्जर खड़ंजा मार्ग पर ग्रामीणों का छलका दर्द

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मोतिगरपुर (सुल्तानपुर)।परखोत्तमपुर से खडसरा तक करीब ढाई किलोमीटर लंबा खड़ंजा मार्ग पिछले 23 वर्षों से पक्की सड़क बनने की राह देख रहा है। वर्ष 2002 में जिला पंचायत निधि से बनाए गए इस मार्ग की हालत अब इतनी खराब हो चुकी है कि जगह-जगह बड़े - बड़े गड्ढे बन गए हैं और बरसात के दिनों में आवागमन जोखिम भरा हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से मांग की जा रही है, लेकिन आज तक सड़क का डामरीकरण नहीं हो सका।
इस रास्ते को तत्कालीन जिला पंचायत अध्यक्ष ओ.पी. चौधरी के कार्यकाल में बघैला तालाब के रास्ते परखोत्तमपुर से खडसरा तक खड़ंजा मार्ग का निर्माण कराया गया था। सड़क के साथ जलनिकासी के लिए पुल भी बनाया गया, जिससे खडसरा, परखोत्तमपुर, पहाड़पुर सराय भीखम, डड़वा कला, चौहानपुर, पेमापुर सहित आधा दर्जन गांवों का ब्लॉक मुख्यालय और मुख्य सड़क से सीधा संपर्क स्थापित हो गया। इससे ग्रामीणों को काफी राहत मिली थी।
समय बीतने के साथ बढ़ते यातायात, भारी वाहनों की आवाजाही और बरसात में सड़क किनारे लंबे समय तक पानी भरे रहने के कारण खड़ंजा मार्ग कई स्थानों पर धंस गया। अधिकांश हिस्से गहरे गड्ढों में तब्दील हो चुके हैं। तालाब के पास बना ऊंचा पुल भी ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी कस सबब बना हुआ है। भारी वाहन पुल पर आसानी से नहीं चढ़ पाते, जिससे निर्माण सामग्री, कृषि उत्पाद और अन्य सामान लाने-ले जाने में अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है। स्कूल जाने वाले बच्चों और मरीजों को भी लंबा चक्कर लगाकर सफर करना पड़ता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि हर चुनाव में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रत्याशी इस मार्ग को पक्की सड़क में बदलने का वादा करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही सभी आश्वासन भुला दिए जाते हैं। इससे लोगों में लगातार नाराजगी बढ़ रही है।
हालांकि अब सड़क निर्माण की उम्मीद फिर जगी है। सदर विधायक राज प्रसाद उपाध्याय ने बताया कि परखोत्तमपुर-खडसरा मार्ग के डामरीकरण का प्रस्ताव संबंधित विभाग को भेजा गया था। पीडब्ल्यूडी ने नाबार्ड योजना के तहत 2500 मीटर सड़क निर्माण की कार्ययोजना तैयार कर शासन को भेज दी है। प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने के बाद शीघ्र ही निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस मार्ग का शीघ्र डामरीकरण हो जाता है तो हजारों लोगों को राहत मिलेगी, आवागमन सुगम होगा और क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी।

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